जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में विजयादशमी से एक दिन पहले ऐतिहासिक पंजाबी दशहरा महोत्सव भव्यता और उत्साह के साथ मनाया गया। गौरीघाट स्थित शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज मैदान में आयोजित 74वें पंजाबी दशहरा महोत्सव में असत्य पर सत्य की जीत के साक्षी बनने हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। यहां करीब 75 फीट ऊंचे रावण और कुंभकरण के विशालकाय पुतलों का दहन किया गया। जैसे ही पुतले आग की लपटों में घिरे, पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। सतरंगी आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए। हर साल विजयादशमी की पूर्व संध्या पर होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में इस बार भी लोगों का भारी उत्साह देखने को मिला।
राम को कंधे पर बैठाकर मैदान में घूमे मंत्री राकेश सिंह
पंजाबी दशहरा महोत्सव में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और जबलपुर पश्चिम के विधायक राकेश सिंह विशेष अंदाज में नजर आए। उन्होंने हनुमान की तरह भगवान राम की भूमिका निभा रहे पात्र को अपने कंधे पर बैठाया और मैदान में भ्रमण किया। इस दृश्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन में पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत, राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। साधु-संतों की मौजूदगी में धार्मिक उत्साह के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
74 साल की परंपरा, अगले साल होगा 75वां आयोजन
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने पंजाबी दशहरा महोत्सव को जबलपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि पंजाबी दशहरे को मनाते हुए करीब 74 वर्ष हो चुके हैं। जबलपुर के विकास और सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने में पंजाबी समाज का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का शहर में विशेष महत्व है और आने वाले वर्षों में इसे और भी भव्यता के साथ मनाने का प्रयास किया जाएगा। अगले वर्ष पंजाबी दशहरा महोत्सव का 75वां आयोजन होगा, जिसे लेकर समाज और शहर के लोगों में खासा उत्साह है। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते इस तरह के आयोजनों में अपनी भूमिका निभाना उनकी जिम्मेदारी है, जिसका वे लगातार निर्वहन करते रहेंगे।
रावण दहन के साथ मन के विकारों को मिटाने का संदेश
नरसिंह मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी नरसिंहदास महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और रावण दहन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने धरती पर अवतार लेकर लोकमंगल, धर्म की स्थापना और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। रावण अहंकार, दंभ और अधर्म का प्रतीक था, जिसका अंत करके भगवान राम ने सत्य और धर्म की विजय स्थापित की। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष और जन्मभूमि का महत्व सर्वोपरि है।

स्वामी नरसिंहदास महाराज ने कहा कि विजयादशमी पर हम हर साल रावण के पुतले का दहन करते हैं, लेकिन इस पर्व का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर मौजूद बुराइयों को भी समाप्त करने का संकल्प लेना है। अहंकार, पाखंड और दंभ जैसे विकारों को त्यागकर ही भगवान राम के आदर्शों को जीवन में उतारा जा सकता है।
इस तरह जबलपुर का 74वां पंजाबी दशहरा महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बना। विशालकाय पुतलों के दहन के साथ लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश आत्मसात किया। अब अगले वर्ष होने वाले 75वें आयोजन को और भव्य बनाने की तैयारियों और उम्मीदों के साथ इस ऐतिहासिक परंपरा का उत्साह एक बार फिर देखने को मिला।
