छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने की है। करीब दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले अमित सक्सेना ने शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में पूर्व सांसद नकुलनाथ की मौजूदगी में फिर से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ कई समर्थक भी कांग्रेस में शामिल हुए। इस घटनाक्रम को छिंदवाड़ा की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच बदलते सियासी समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस में वापसी के बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले को बड़ी भूल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में जनहित के मुद्दे उठाना अपराध की तरह माना जाता है। सक्सेना के मुताबिक, जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के उद्देश्य से उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ा और अब दोबारा कांग्रेस में लौटने का फैसला किया है।
दरअसल, बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अमित सक्सेना ने कांग्रेस और कमलनाथ का साथ छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले सक्सेना की राजनीतिक पारी में यह बड़ा बदलाव माना गया था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से वे पार्टी की निर्धारित लाइन से अलग हटकर किसान आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे थे।
छिंदवाड़ा को सूखाग्रस्त घोषित करने समेत किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर अमित सक्सेना गांव-गांव बैठकें कर रहे थे। इन बैठकों के जरिए किसान आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। बताया जा रहा है कि इस गतिविधि को लेकर जिला भाजपा की ओर से उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बावजूद सक्सेना किसान आंदोलन में शामिल हुए और बाद में भाजपा से इस्तीफा दे दिया।
शनिवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर नकुलनाथ के समक्ष पार्टी की सदस्यता ले ली। इस दौरान पूर्व सांसद नकुलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की घर वापसी का अभियान छिंदवाड़ा से शुरू हो रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसी को पार्टी में वापस ले लिया जाएगा। नकुलनाथ के मुताबिक, जिन लोगों को अपनी गलती का एहसास होगा, उनकी वापसी पर सोच-समझकर फैसला लिया जाएगा। अमित सक्सेना की कांग्रेस में वापसी के बाद छिंदवाड़ा की सियासत में एक बार फिर दल-बदल और किसान मुद्दों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
