विज्ञापन

MP : दर्शन की आस में आए थे, अपनों की लाश लेकर लौटे… शीतला माता के दरबार में बिखर गईं परिवारों की खुशियां, 14 की मौत, 35 घायल

[inb_subtitle]

Author Picture
thenewsmp
October 18, 2026
Author Picture
Published On: October 18, 2026

विज्ञापन

ग्वालियर। रात के अंधेरे में आंखों में श्रद्धा, मन में विश्वास और परिवार के साथ माता के दर्शन की आस लेकर निकले लोग शायद यही सोच रहे थे कि सुबह तक घर लौटकर इस यात्रा की यादें साझा करेंगे। लेकिन मध्यप्रदेश के ग्वालियर चीनौर रोड पर शीतला माता मंदिर के पास कुछ ऐसा हुआ कि कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। जिस रास्ते पर माता के जयकारे गूंजने थे, वहां चीखें सुनाई देने लगीं। कोई अपने बेटे को पुकार रहा था, तो कोई भाई को तलाश रहा था। किसी को उम्मीद थी कि उसका अपना अस्पताल में मिल जाएगा, तो किसी की आंखें उस चेहरे को खोज रही थीं, जिसे वह आखिरी बार देख भी नहीं पाया था।

शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे तेज रफ्तार बेकाबू ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ दुकानों से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि मंदिर के प्रवेश द्वार की दीवार तक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 35 लोग घायल हुए। इनमें दो होमगार्ड जवान भी शामिल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई गई।

एक ही रात में भाई का साथ छूट गया

हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर 16 वर्षीय गणेश के बड़े भाई आकाश बघेल के दर्द में दिखाई देती है। दोनों परिवार के साथ माता के दर्शन करने पहुंचे थे। कुछ लोग ऊपर चले गए और गणेश मंदिर के प्रवेश द्वार के पास नीचे बैठा था। तभी मौत बनकर आया ट्रक लोगों को रौंदता चला गया।

आकाश की आंखों के सामने उनका छोटा भाई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। वह उसे बचाना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे थे कि चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। जिस भाई के साथ घर से निकले थे, उसी के बिना लौटने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। हादसे को याद करते हुए आकाश फूट-फूटकर रो पड़े। उनके लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जिंदगी भर का ऐसा खालीपन है, जिसे कोई भर नहीं सकता।

बेटे की सांसों की उम्मीद और मां की बेबसी

इस हादसे में 19 वर्षीय बेटे को खोने वाली किरण की कहानी भी झकझोर देने वाली है। उनका आरोप है कि जब वह बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचीं, तब उसकी सांसें चल रही थीं। वह उसे निजी अस्पताल ले जाकर इलाज कराना चाहती थीं, लेकिन उनके मुताबिक पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोका और वापस ले आए।

किरण का कहना है कि उन्होंने रोते हुए हाथ-पैर जोड़े, लेकिन बेटे को इलाज के लिए नहीं ले जा सकीं। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि उसे आखिरी वक्त तक बेटे के बचने की उम्मीद हो, लेकिन वह उसे इलाज दिलाने में खुद को बेबस महसूस करे। हालांकि, उनके आरोपों और उस दौरान हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।

दर्शन के बाद शुरू हुई अपनों की तलाश

सावित्री के परिवार के लिए भी वह रात किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। उनके मुताबिक, दर्शन के बाद परिवार के लोग बाहर आ गए, लेकिन देवरानी का बेटा दिव्यांश नहीं मिला। पहले तलाश की गई, फिर पुलिस को सूचना दी गई। आखिरकार अंदर जाकर उसकी पहचान हुई।

उधर, निकेश के परिजनों को सुबह करीब पांच बजे फोन आया कि उनका भाई हादसे में घायल हो गया है। मौके पर पहुंचे तो निकेश गंभीर हालत में मिला। उसके दोनों पैर टूट गए थे और वह वेंटिलेटर पर था।

अब सवालों के बीच रह गईं यादें

हादसे में घायल लोगों के परिजनों ने बताया कि सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। वहीं, हादसे की खबर सुनकर पहुंचे लोकेंद्र सिंह तोमर ने राहत-बचाव प्रयासों को स्वीकार करते हुए सवाल उठाया कि जब दोपहिया वाहनों तक की आवाजाही रोकी जाती है, तो भारी ट्रक मंदिर के प्रवेश द्वार तक कैसे पहुंच गया

प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य के साथ जांच शुरू की है। लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए, उनके लिए जांच और कार्रवाई के साथ इंसाफ की उम्मीद भी जुड़ी है।

शीतला माता के दरबार में लोग सुख-समृद्धि मांगने आए थे। किसी ने अपने भाई को खो दिया, किसी ने बेटा और किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए बिखर गईं। अब वहां दर्शन की यादों के साथ उस रात का दर्द भी जुड़ गया है एक ऐसी रात, जब लोग माता के दरबार से आशीर्वाद लेकर लौटने निकले थे, लेकिन कई परिवारों के हिस्से में सिर्फ आंसू और अपनों की यादें रह गईं।

Leave a Comment