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जबलपुर : ट्रेन में अकेले मुंबई जा रहा था 13 साल का बालक, टिकट चेकिंग स्टाफ ने आरपीएफ को सौंपा,

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Shubhampatkar
October 14, 2026
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Published On: October 14, 2026

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जबलपुर। ट्रेन में अकेले मुंबई जा रहे 13 वर्षीय बालक को टिकट चेकिंग स्टाफ और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की तत्परता से मदद मिली। ट्रेन में कम उम्र के बालक को अकेले यात्रा करते देखकर टिकट चेकिंग स्टाफ ने उससे पूछताछ की। इस दौरान बालक ने बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह अपनी दादी के साथ रहता है। वह काम के सिलसिले में मुंबई जा रहा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दी और बालक को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए समन्वय स्थापित किया। बाद में बालक को नरसिंहपुर रेलवे सुरक्षा बल के स्टाफ के सुपुर्द कर दिया गया।

रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला ट्रेन संख्या 15018 में यात्रा के दौरान सामने आया। ट्रेन में ड्यूटी कर रहे टिकट चेकिंग स्टाफ सेवाराम झरिया की नजर 13 वर्षीय नोमान हुसैन पर पड़ी। बालक बी-1 कोच के दरवाजे के पास मिला। उसकी कम उम्र और अकेले यात्रा करने की स्थिति को देखते हुए टिकट चेकिंग स्टाफ ने उससे बातचीत की और उसके बारे में जानकारी जुटाई।

पूछताछ में बताई अपनी परेशानी

पूछताछ के दौरान बालक ने बताया कि वह अकेले मुंबई जा रहा है। उसने यह भी बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह अपनी दादी के साथ रहता है। बालक के अनुसार, वह काम के सिलसिले में मुंबई की यात्रा कर रहा था। इतनी कम उम्र में अकेले दूसरे शहर जाने की बात सामने आने के बाद रेलवे कर्मचारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और उसकी सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाए।

वाणिज्य नियंत्रक ने आरपीएफ को दी सूचना

मामले की जानकारी मिलने पर वाणिज्य नियंत्रक अमित चंसौरिया ने नरसिंहपुर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को बालक के संबंध में आवश्यक जानकारी दी। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया, ताकि बालक को सुरक्षित तरीके से सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आगे की कार्रवाई के लिए बालक को आरपीएफ स्टाफ मोहनलाल मिश्रा के सुपुर्द किया गया।

रेल कर्मचारियों की सतर्कता से मिली मदद

इस पूरे मामले में टिकट चेकिंग स्टाफ सेवाराम झरिया की सजगता और वाणिज्य नियंत्रक अमित चंसौरिया की ओर से समय पर सूचना दिए जाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यदि बालक की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो उसकी परेशानी का पता चलना मुश्किल हो सकता था। रेलवे कर्मचारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले को संबंधित सुरक्षा एजेंसी तक पहुंचाया।

 

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