122 साल पुरानी मॉडल हाई स्कूल की पहचान बचाने उतरे सैकड़ों पूर्व छात्र, सांसद आशीष दुबे से मिल
सीएम राइज-सांदीपनि विद्यालय में तब्दील करने के प्रस्ताव का विरोध,
बोले- स्कूल की ऐतिहासिक इमारत और उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा बरकरार रखे सरकार
जबलपुर। संस्कारधानी की 122 साल पुरानी शैक्षणिक विरासत पंडित लज्जाशंकर झा शासकीय मॉडल उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की पहचान बचाने के लिए अब पूर्व छात्र एकजुट हो गए हैं। रविवार को स्कूल के सैकड़ों पूर्व विद्यार्थियों ने जबलपुर के सांसद आशीष दुबे से मुलाकात कर विद्यालय को सीएम राइज यानी सांदीपनि विद्यालय में परिवर्तित किए जाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की। पूर्व छात्रों ने सांसद को ज्ञापन सौंपकर आग्रह किया कि विद्यालय का वर्तमान स्वरूप और उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा बरकरार रखा जाए तथा शासन की ओर से मिलने वाली राशि भी इसी स्वरूप में विकास कार्यों पर खर्च की जाए।
दरअसल वर्ष 1904 में स्थापित यह विद्यालय जबलपुर की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत का हिस्सा है। यहां से पढ़कर निकले विद्यार्थी देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व छात्रों का कहना है कि इस स्कूल से उनका जुड़ाव केवल एक शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि परिवार और मंदिर की तरह है। विद्यालय की ऐतिहासिक इमारत, शैक्षणिक परंपराएं और उत्कृष्टता इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में इसके स्वरूप और दर्जे में बदलाव से वर्षों पुरानी विरासत प्रभावित हो सकती है।
हेरिटेज बिल्डिंग और मेरिट आधारित प्रवेश पर चिंता
पूर्व छात्रों ने सांसद के सामने आशंका जताई कि यदि विद्यालय को सीएम राइज अथवा सांदीपनि विद्यालय योजना के अंतर्गत शामिल किया गया तो इसकी पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग का मूल स्वरूप नष्ट हो सकता है। इसके साथ ही उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में मिलने वाली पहचान, मेरिट आधारित प्रवेश व्यवस्था और अनुभवी शिक्षकों की नियुक्ति-स्थानांतरण की मौजूदा परंपरा भी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा और मेरिट के आधार पर अवसर मिलता है। इसे बदलने से विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
पांच किलोमीटर के दायरे में पहले से सांदीपनि विद्यालय
ज्ञापन में पूर्व छात्रों ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनुसार जबलपुर के पूर्व विधानसभा क्षेत्र में स्थित शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अधारताल को पहले ही सांदीपनि विद्यालय बनाया जा चुका है। मॉडल उत्कृष्ट विद्यालय भी इसी क्षेत्र में स्थित है और दोनों विद्यालयों के बीच की दूरी पांच किलोमीटर से कम है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में पहले से संचालित सांदीपनि विद्यालय के बावजूद 122 वर्ष पुराने उत्कृष्ट विद्यालय को भी उसी योजना में शामिल करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं।
पूर्व छात्रों ने मांग की कि दोनों विद्यालयों की भौगोलिक स्थिति, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं और प्रवेश व्यवस्था का तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाए। मॉडल स्कूल को उसकी वर्तमान उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी में ही संचालित किया जाए।
सांसद भी इसी स्कूल के 1988 बैच के विद्यार्थी
खास बात यह है कि सांसद आशीष दुबे भी इसी विद्यालय के वर्ष 1988 बैच के पूर्व छात्र हैं। ऐसे में पूर्व छात्रों ने उनसे अपनी भावनाएं साझा करते हुए इस विरासत को बचाने के लिए शासन स्तर पर पहल करने का आग्रह किया। पूर्व छात्र संगठन के संयुक्त सचिव युवराज जैन गड़ावाल ने कहा कि संगठन में 1940, 1950, 1960, 1970 और 1980 के दशक में पढ़े विद्यार्थी शामिल हैं। सभी इस विद्यालय की पहचान बचाने के लिए एकजुट हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय हमारे लिए केवल भवन नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और गौरव है। सरकार को विद्यालय के विकास के लिए फंड देना चाहिए, लेकिन उसकी ऐतिहासिक पहचान और उत्कृष्टता समाप्त किए बिना।
पूर्व छात्रों ने सांसद से आग्रह किया कि वे शासन के समक्ष इस विषय को गंभीरता से उठाएं, ताकि 122 साल पुरानी शैक्षणिक विरासत सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली संस्थान का हिस्सा बन सकें।

