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17 साल तक सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में फर्जी MBBS DOCTOR करता रहा नौकरी, दस्तावेजों की जांच में खुला फर्जीवाड़ा! फर्जी डॉक्टर के खिलाफ FIR

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Shubhampatkar
October 14, 2026
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Published On: October 14, 2026

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बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिरसा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) दमोह में पदस्थ रहे चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार सिंह पर फर्जी शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप है। मामले की जांच में दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने के बाद अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। हैरानी की बात यह है कि चिकित्सक वर्ष 2009 में संविदा नियुक्ति मिलने के बाद करीब 17 वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देते रहे। इस दौरान उनका नियमितीकरण भी हो गया और उन्हें पदोन्नति का लाभ भी मिल चुका था।

2023 में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान खुला मामला

बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. शत्रुघ्न दाहिया के मुताबिक, डॉ. सुनील कुमार सिंह की नियुक्ति वर्ष 2009 में जिला स्तर पर संविदा प्रक्रिया के तहत हुई थी। नियुक्ति के बाद वे लगातार स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देते रहे। समय के साथ उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं और उन्हें प्रमोशन का लाभ भी मिला। लंबे समय तक विभागीय व्यवस्था में काम करने के बाद उनके दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठे।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में नियमितीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान उनके मूल दस्तावेज दोबारा मांगे गए थे। इसके बाद दस्तावेजों का गहन सत्यापन और मिलान किया गया। इसी प्रक्रिया में उनके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

पहले हुई जांच, फिर भोपाल भेजी गई रिपोर्ट

सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न दाहिया ने बताया कि पूर्व में तत्कालीन सीएमएचओ स्तर पर मामले की जांच कराई गई थी। जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों को फर्जी पाया गया था। इसके बाद प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज उच्च अधिकारियों के माध्यम से भोपाल कार्यालय भेजे गए। भोपाल स्तर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

विभागीय स्तर पर कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए बिरसा ब्लॉक के बीएमओ के माध्यम से डॉ. सुनील कुमार सिंह के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस को जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि मामले की विस्तृत जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके।

जांच पूरी होने तक चिकित्सकीय और प्रशासनिक कार्यों पर रोक

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित चिकित्सक को फिलहाल चिकित्सकीय और प्रशासनिक कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई है। सीएमएचओ के मुताबिक, भोपाल स्तर पर इस प्रकरण से जुड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस अब एफआईआर के आधार पर मामले की जांच करेगी और दस्तावेजों से संबंधित तथ्यों की पड़ताल करेगी।

इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और लंबे समय तक चली प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2009 में संविदा नियुक्ति से शुरू हुआ सफर नियमितीकरण और पदोन्नति तक पहुंच गया, लेकिन वर्ष 2023 में दस्तावेजों के दोबारा सत्यापन के दौरान कथित फर्जीवाड़ा सामने आया। अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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