भोपाल। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त ने बड़ी कार्यवाही करते हुए वाणिज्यिक कर अधिकारी के तीन ठिकाने पर एक साथ छापा मारा है। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी मनीष कुमार जैन के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा है। वर्तमान में दमोह में पदस्थ अधिकारी के जबलपुर और भोपाल स्थित ठिकानों के साथ सागर जिले की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में अधिकारी की कुल आय करीब 1.03 करोड़ रुपये के मुकाबले 3.78 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और खर्च का ब्योरा सामने आया है। लोकायुक्त के मुताबिक, यह राशि उनकी वैध आय से करीब 300 प्रतिशत अधिक अनुपातहीन पाई गई है। फिलहाल तीन अलग-अलग टीमें दस्तावेजों, जमीनों, मकानों, वाहनों और बीमा पॉलिसियों से संबंधित जानकारी खंगाल रही हैं। वहीं सुरक्षा को देखते हुए पुलिस पुलिस बल तैनात किया गया है।
लोकायुक्त पुलिस को वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी मनीष कुमार जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। शिकायत का सत्यापन निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया से कराया गया। सत्यापन में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धाराओं 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
मंगलवार 27 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से जबलपुर स्थित अधिकारी के निवास पर छापे की कार्यवाही शुरू हुई। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही है। लोकायुक्त की शुरुआती जांच में अधिकारी मनीष कुमार जैन के अलावा उनकी पत्नी निधि जैन, पिता कोमलचंद जैन और माता शशि जैन के नाम पर भी कई संपत्तियों का पता चला है। इनमें जमीन, मकान, बंगला और फ्लैट शामिल हैं।
जबलपुर में अधिकारी के नाम पर 278.74 वर्ग मीटर जमीन मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है। उनकी पत्नी के नाम पर भी जबलपुर में दो प्लॉट होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भोपाल में पत्नी के नाम पर 180 वर्ग मीटर जमीन पर बने बंगले और 83.18 वर्ग मीटर के फ्लैट का ब्योरा मिला है। पत्नी के नाम पर एक अन्य प्लॉट भी दर्ज बताया गया है। वहीं सागर जिले की बंडा तहसील में अधिकारी के माता-पिता के नाम पर प्लॉट और उन पर बने मकानों की जानकारी मिली है। लोकायुक्त इन संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों और उनके मूल्य का सत्यापन कर रही है।
जांच में पत्नी के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस स्कूटर होने की जानकारी सामने आई है। दोनों वाहनों का अनुमानित मूल्य करीब 5.10 लाख रुपये बताया गया है। इसके अलावा अधिकारी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों से संबंधित करीब 33.93 लाख रुपये के खर्च का भी उल्लेख किया गया है। लोकायुक्त की तीन टीमें अलग-अलग स्थानों पर दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसके बाद संपत्तियों और खर्च का विस्तृत ब्योरा सामने आने की उम्मीद है।
लोकायुक्त की डीएसपी नीतू त्रिपाठी ने बताया कि अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद सर्च कार्रवाई शुरू की गई। जबलपुर के अलावा भोपाल और सागर जिले की बंडा तहसील में भी संपत्तियों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनकी गणना और जांच जारी है।
शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अधिकारी की आय 1 करोड़ 3 लाख 73 हजार 317 रुपये आंकी गई है, जबकि संपत्ति और खर्च का कुल मूल्य 3 करोड़ 78 लाख 25 हजार 707 रुपये बताया गया है। यानी दोनों के बीच करीब 2 करोड़ 74 लाख 52 हजार रुपये का अंतर सामने आया है। हालांकि यह शुरुआती जांच का ब्योरा है। अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों के सत्यापन, संपत्तियों के मूल्यांकन और आय के सभी वैध स्रोतों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई अभी भी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही मामले में सामने आई संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम गणना स्पष्ट हो सकेगी।

