विज्ञापन

उठाओ चम्मच और निकल पड़ो शहर घूमने! नवरात्रि में कहां मिलेगा भंडारा, कहां सजे हैं दुर्गा पंडाल? एक क्लिक में मिलेगी पूरी जानकारी

[inb_subtitle]

Author Picture
Shubhampatkar
October 18, 2026
Author Picture
Published On: October 18, 2026

विज्ञापन

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में त्योहारों की रौनक हो और भंडारों की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है! यहां त्योहार आते ही गलियों से लेकर घाटों तक भंडारों की बहार छा जाती है। आलम यह है कि लोग घर से निकलते वक्त चम्मच, पानी की बोतल और कप तक साथ लेकर चलते हैं। लेकिन असली परेशानी तब होती है, जब एक भंडारे से दूसरे भंडारे तक पहुंचने के चक्कर में कई शानदार पंडाल और स्वादिष्ट मेन्यू छूट जाते हैं। इसी परेशानी का डिजिटल तोड़ निकालते हुए जबलपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंटेंट क्रिएटर भावेश तुलानी ने बनाई है एक खास वेबसाइट, जहां एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि शहर में कहां भंडारा चल रहा है, मेन्यू क्या है और वहां तक पहुंचने का रास्ता कौन-सा है।

भावेश तुलानी बताते हैं कि वे अपने दोस्तों नेल्सन, वासु और नमन के साथ जबलपुर में त्योहारों के दौरान घूमने निकलते थे। इस दौरान ग्वारीघाट जैसे इलाकों में कदम-कदम पर भंडारे दिखाई देते थे। संस्कारधानी की इस अनोखी परंपरा को देखकर उनके मन में सवाल आया कि क्यों न ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जहां शहर के सभी पंडालों और भंडारों की जानकारी एक ही जगह मिल सके। इसी सोच ने ‘पंडाल हॉपिंग’ वेबसाइट का रूप ले लिया।

भावेश के मुताबिक, वेबसाइट पर अब तक 264 पंडाल जोड़े जा चुके हैं। इनमें पंडालों के पते, आयोजन की जानकारी और भंडारे के मेन्यू से लेकर समय तक की डिटेल उपलब्ध है। खास बात यह है कि जानकारी को विश्वसनीय बनाए रखने के लिए वे संबंधित समितियों से संपर्क करते हैं। यदि कोई जानकारी किसी अन्य व्यक्ति से मिलती है, तो उसे वेबसाइट पर डालने से पहले समिति से पुष्टि की जाती है। समितियों के इंस्टाग्राम अकाउंट की जानकारी भी दी गई है, जिससे लोग आयोजन के बारे में और जानकारी हासिल कर सकें।

वेबसाइट का सबसे खास फीचर इसका रूट प्लानर है। मान लीजिए, किसी को एक दिन में 40 पंडाल घूमने हैं, तो वह अपनी लोकेशन और पसंद के पंडालों की जानकारी डालकर घूमने का रूट तैयार कर सकता है। इससे अलग-अलग जगहों पर जाने की योजना बनाना आसान हो जाता है। हालांकि, रूट पंडाल के बिल्कुल प्रवेश द्वार तक पहुंचाने के बजाय उसके आसपास के इलाके तक मार्ग दिखाता है।

Teem

वेबसाइट में ‘लाइव भंडारा’ फीचर भी दिया गया है। इसे चुनते ही उस दिन होने वाले भंडारों की जानकारी सामने आ जाती है। उदाहरण के तौर पर गंजिपुरा के हरदौल मंदिर में आलू चाप के भंडारे और लिंक रोड पर पूरी-सब्जी व आइसक्रीम जैसे आयोजनों की जानकारी मिल सकती है। आने वाले दिनों के भंडारों और उनके मेन्यू की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।

भावेश ने बताया कि वेबसाइट से जुड़ी उनकी रील को करीब 5 से 6 लाख लोगों ने देखा, जबकि लगभग 10 से 30 हजार लोगों ने वेबसाइट का इस्तेमाल किया। उन्हें लोगों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। अब उनकी योजना चल समारोह और दशहरे जैसे आयोजनों की जानकारी भी इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की है।

भविष्य में वे इसे पूरे देश में फैलाना चाहते हैं ताकि अलग-अलग शहरों के क्रिएटर्स और आयोजन समितियां इससे जुड़ सकें। कुल मिलाकर, जबलपुर की भंडारा संस्कृति को डिजिटल पहचान देने की यह पहल उन लोगों के लिए खास है, जो त्योहारों में घूमने के साथ हर भंडारे का स्वाद चखना चाहते हैं। अब बस चम्मच उठाइए, वेबसाइट खोलिए और निकल पड़िए अपनी पसंद के भंडारों की सैर पर

Leave a Comment