जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में गरबा आयोजन के दौरान हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं और आयोजन समिति के बीच जमकर विवाद हो गया। धनवंतरी नगर चौकी क्षेत्र के जाबाली पैलेस स्थित जसूजा सिटी में हुए इस विवाद ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच हुई झूमाझटकी और मारपीट में कई लोगों को चोटें आईं, जबकि एक पुलिसकर्मी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों का मेडिकल अस्पताल में मुलायजा कराया गया।
जानकारी के मुताबिक गरबा आयोजन में बजाए जा रहे गानों और गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की महिला कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। इसी बात को लेकर कार्यकर्ताओं और आयोजकों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिंदूवादी संगठन ने आरोप लगाया कि दुर्गा वाहिनी की महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और धक्का-मुक्की की गई। संगठन के मुताबिक, घटना में बजरंग दल की महिलाओं सहित चार से पांच कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं।
विश्व हिंदू परिषद की सहसंयोजिका सिमरन यादव ने आरोप लगाया कि वे अपनी साथियों के साथ जसूजा सिटी में गरबा आयोजन देखने गई थीं। वहां पहुंचते ही उनके साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट और धक्का-मुक्की की गई। सिमरन के मुताबिक, इस दौरान उनकी भगवा पहचान को लेकर भी गाली-गलौज की गई। उन्होंने बताया कि वे केवल गरबा आयोजन की स्थिति देखने गई थीं और उन्हें पहले से किसी तरह की सूचना नहीं मिली थी। आरोप है कि आयोजन स्थल के अंदर पहुंचते ही दुर्गा वाहिनी की एक महिला कार्यकर्ता पर हाथ उठाया गया, जिसके बाद उनके साथ भी धक्का-मुक्की की गई।
सिमरन यादव ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से संगठन की महिला कार्यकर्ताओं और अन्य सदस्यों को चोटें आई हैं। सिमरन ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मारपीट व अभद्रता करने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
विश्व हिंदू परिषद की जिला संयोजिका आरती शुक्ला ने बताया कि दशहरे के अवसर पर वे अन्य महिलाओं के साथ नगर भ्रमण पर निकली थीं। इसी दौरान वे गरबा आयोजन में पहुंचीं, जहां प्रवेश के संबंध में पूछताछ की। उन्होंने आरोप लगाया कि आधार कार्ड दिखाने की व्यवस्था के बारे में पूछने पर आयोजकों की ओर से कहा गया कि आधार कार्ड की जरूरत नहीं है, 500 रुपये दीजिए और प्रवेश कर लीजिए। उन्होंने रात के 10 से 10:30 बजे का समय होने और प्रशासन के नियमानुसार आयोजन बंद होने का समय होने की बात कही, लेकिन उन्हें बताया गया कि गरबा रात 2 बजे तक चलता है।
आरती शुक्ला के अनुसार, वे अपनी अन्य साथियों के आने का इंतजार करते हुए वहीं खड़ी थीं। इसी दौरान आयोजन समिति के कार्यकर्ताओं को पता चला कि बजरंग दल के लोग बाहर खड़े हैं। आरोप है कि इसके बाद समिति के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और उनके साथ अभद्रता करने लगे। महिलाओं को गंदी गालियां दी गईं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, धक्का-मुक्की की गई और मारपीट भी की गई। कुछ समय बाद बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ता पहुंचे और उन्होंने बीच-बचाव किया।
आरती शुक्ला ने बताया कि इस मामले में आयोजकों और मारपीट करने वालों के खिलाफ शिकायत की गई है। उन्होंने मांग की कि मामले में ठोस कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसी घटनाओं में शामिल आयोजकों की समिति की अनुमति निरस्त की जाए। साथ ही, भविष्य में संबंधित समिति को किसी भी आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विश्व हिंदू परिषद की जिला उपाध्यक्ष माला विश्वकर्मा ने बताया कि वे गरबा आयोजन में केवल यह देखने के लिए गई थीं कि वहां कार्यक्रम किस तरह हो रहा है। उन्होंने आयोजकों से निवेदन किया कि उन्हें अंदर जाने दिया जाए, लेकिन प्रवेश देने से मना कर दिया गया। जब उन्होंने बताया कि वे बजरंग दल से जुड़ी हैं, तो कथित तौर पर उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे वहां से जाने लगीं, तो एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का दे दिया, जिससे वे नीचे गिर गईं। इसके बाद तीन-चार लोगों ने उनके साथ मारपीट करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता करते हुए साड़ी खींची गई और सीने पर हाथ लगाया गया।
माला विश्वकर्मा ने कहा कि मौके पर मौजूद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन के दौरान महिलाओं के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई, जो बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि आयोजन समिति की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और उसकी अनुमति निरस्त करने पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो उनकी सुरक्षा और सम्मान पर सवाल खड़े होंगे।
विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल के विभाग मंत्री राजेश रैकवार ने आरोप लगाया कि जसुजा सिटी में गरबा आयोजन के दौरान दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे दुर्गा वाहिनी की कुछ बहनें गरबा आयोजन की जानकारी लेने जसुजा सिटी पहुंची थीं। वहां उन्होंने बाउंसरों से गरबा आयोजन और प्रवेश की व्यवस्था के बारे में पूछा। बाउंसरों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति देते हुए बताया कि गरबा रात 2 बजे तक चलता है।
इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों को जानकारी मिली कि बजरंग दल की मातृशक्ति की कार्यकर्ता पहुंची हैं। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग अचानक वहां आए और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट शुरू कर दी, जिसमें कई महिलाओं को चोटें आईं। देखते ही देखते मौके पर हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस भी मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट होने की बात सामने आई।
राजेश रैकवार के मुताबिक घटना में बजरंग दल के दो कार्यकर्ताओं और दुर्गा वाहिनी की कुछ महिलाओं को चोटें आई हैं। घायल कार्यकर्ता शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि गरबा आयोजनों में असामाजिक तत्वों और विधर्मियों के प्रवेश को लेकर मिल रही चर्चाओं के बीच दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ता स्थिति की जानकारी लेने पहुंची थीं। उनका आरोप है कि इसी दौरान आयोजकों की ओर से उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि, गरबा आयोजन किसके द्वारा कराया जा रहा था और विवाद की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
वही दूसरा पक्ष आयोजन समिति की ओंर से जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने खुद को धार्मिक संगठन से जुड़ा बताते हुए कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न किया और तोड़फोड़ की। उन्होंने दावा किया कि कुछ महिलाएं चाकू लेकर हमला कर रही थीं, जिसे सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है। मिश्रा के मुताबिक, घटना के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि धार्मिक संगठनों के नाम पर इस तरह आयोजनों में बाधा उत्पन्न करने से प्रशासन, पुलिस और आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मनीष मिश्रा ने शासन और प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि यदि ऐसे संगठन ही तय करेंगे कि कौन महिला क्या पहनेगी, कौन पुरुष क्या पहनेगा और कौन-सा कार्यक्रम होगा या नहीं होगा, तो फिर प्रशासन को कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार भी इन्हीं संगठनों को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रात दो-तीन बजे तक लोगों को इस विवाद के कारण मौके पर खड़ा रहना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट निर्णय लेकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि शहर में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।
उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोग गरबा खेलने आने की बात कह रहे थे, लेकिन उनके पास न पास था और न टिकट। मिश्रा ने सवाल उठाया कि जबलपुर में कई स्थानों पर गरबा आयोजन हो रहे हैं, तो वे लोग वहीं क्यों नहीं गए और जसूजा सिटी में ही क्यों पहुंचे। उन्होंने चाकू लेकर आने के दावे का हवाला देते हुए आयोजन में व्यवधान उत्पन्न करने की मंशा पर सवाल उठाए। मिश्रा ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक, आयोजन से जुड़े लोग पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
एडिशनल एसपी सिटी आयुष जाखड़ ने बताया कि रात करीब साढ़े 10 बजे के बीच पुलिस को संजीवनी नगर थाना क्षेत्र के जबाली पैलेस में विवाद होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं, जहां कुछ लोगों ने सड़क पर आवागमन रोक रखा था। पुलिस ने पहले लोगों को समझाइश देकर उनकी बात सुनी। कुछ समूह वहां यह जांचने पहुंचे थे कि गरबा आयोजन में कोई अनैतिक गतिविधि या आपत्तिजनक गाने तो नहीं बजाए जा रहे हैं। इसी दौरान आयोजकों के साथ उनका विवाद बढ़ गया और मामला झूमाझटकी तक पहुंच गया। दोनों पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई करेगी।
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। वहां 10 से 12 कैमरों के एंगल से घटना रिकॉर्ड हुई है। इसके अलावा, प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो भी जुटाए जा रहे हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता से जांच की जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई तथा किसकी क्या भूमिका रही। मारपीट की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों को चोटें आई हैं, उन्हें मेडिकल परीक्षण कराने के लिए कहा गया है। मेडिकल रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गरबा आयोजन में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठ रही मांग पर एडिशनल एसपी ने कहा कि यह आयोजकों के विवेक पर निर्भर करता है कि वे किन लोगों को कार्यक्रम में प्रवेश देना चाहते हैं और किन्हें नहीं। पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
गरबा आयोजन में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठे सवाल पर एडिशनल एसपी ने स्पष्ट किया कि किसे प्रवेश देना है, यह आयोजकों के विवेक पर निर्भर करता है। पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि विवाद की शुरुआत किसने की और घटना में किसकी क्या भूमिका रही। अब सबकी नजर पुलिस जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी है।
