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जबलपुर : दुर्गा पंडाल में पेपर लीक, झारखंड आंदोलन और CJP आंदोलन, Gen-Z को दिया संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संदेश

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thenewsmp
October 17, 2026
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Published On: October 17, 2026

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रिपोर्ट : शुभम पाटकर, जबलपुर

जबलपुर। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की भक्ति और अनूठी झांकियों के लिए प्रसिद्ध संस्कारधानी जबलपुर में इस बार एक दुर्गा झांकी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चा में है। शहर के मीठा कुआं, शाही नाका गढ़ स्थित शिवशक्ति दुर्गा उत्सव समिति ने पेपर लीक की घटनाओं और दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को अपनी झांकी का विषय बनाया है। झांकी के जरिए समिति ने परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों पर सवाल उठाने के साथ ही युवाओं के संस्कार, उनके व्यवहार और आंदोलनों के उद्देश्यों को समझने का संदेश दिया है। समिति का कहना है कि भारत का संस्कारित Gen-Z देश को जोड़ने वाला है, तोड़ने वाला नहीं।

मां सरस्वती के स्वरूप में मां दुर्गा, पेन बना त्रिशूल

झांकी का सबसे आकर्षक हिस्सा मां दुर्गा की प्रतिमा है, जिसमें उन्हें मां सरस्वती के स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। मां के हाथ में पारंपरिक त्रिशूल की जगह पेन दिखाया गया है। वहीं, दूसरी ओर लीक हुए प्रश्नपत्रों को आग की लपटों से घिरा हुआ दर्शाया गया है। पेन रूपी त्रिशूल से प्रश्नपत्रों पर प्रहार करते हुए पेपर लीक जैसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश दिया गया है।

समिति के संचालक राजकिशोर श्रीवास्तव के मुताबिक, पेपर लीक की घटनाएं उन करोड़ों विद्यार्थियों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं, जो वर्षों तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनके साथ अभिभावक भी बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत और आर्थिक संसाधन खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां विद्यार्थियों की उम्मीदों को नुकसान पहुंचाती हैं। समिति चाहती है कि पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और संबंधित कानून प्रभावी तरीके से लागू किए जाएं।

कोचिंग माफिया से लेकर सिस्टम तक पर सवाल

राजकिशोर श्रीवास्तव ने पेपर लीक के पीछे कोचिंग संस्थानों, राजनेताओं और अधिकारियों की संभावित भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि बड़े कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों से भारी फीस ली जाती है और अच्छे परिणाम व बेहतर रैंकिंग प्रतिष्ठा का सवाल बन जाते हैं। ऐसे में पेपर लीक की घटनाओं के पीछे संभावित मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए।

 

उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से लेकर बड़े कोचिंग संस्थानों में तैयारी करने वाले छात्रों तक, सभी को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

दिल्ली और झारखंड के आंदोलनों को अलग-अलग नजरिए से दिखाया

समिति ने झांकी में दिल्ली और झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच अंतर दिखाने का प्रयास भी किया है। राजकिशोर श्रीवास्तव के अनुसार, झारखंड में विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगों के लिए लंबे समय तक किए गए आंदोलन को दर्शाया गया है।

वहीं, दिल्ली के आंदोलन को लेकर समिति ने विदेशी फंडिंग, राजनीतिक हस्तक्षेप और कथित अभद्र व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। ये आरोप समिति के संचालक ने लगाए हैं। झांकी के माध्यम से युवाओं से अपील की गई है कि वे किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य, तथ्यों और उसके पीछे की परिस्थितियों को समझें।

20 साल से समसामयिक मुद्दों पर बना रही झांकियां

राजकिशोर श्रीवास्तव ने बताया कि शिवशक्ति दुर्गा उत्सव समिति पिछले 20 वर्षों से दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर रही है। समिति हर साल किसी न किसी सामाजिक, राजनीतिक या समसामयिक मुद्दे को झांकी के माध्यम से उठाती है, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके और वे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करें।

उन्होंने बताया कि इससे पहले समिति ने पश्चिम बंगाल में महिला के साथ हुए दुष्कर्म की घटना को लेकर झांकी तैयार की थी। पिछले वर्ष अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से H-1B वीजा को लेकर किए गए बदलावों का मुद्दा भी उठाया गया था। कोरोना काल में डॉक्टरों और सफाईकर्मियों के योगदान को मां दुर्गा के माध्यम से सम्मानित करने का संदेश दिया गया था।

समिति के संचालक का कहना है कि दुर्गा उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज तक जरूरी संदेश पहुंचाने का माध्यम भी है। इस बार झांकी के जरिए समिति ने पेपर लीक पर रोक लगाने, दोषियों को सजा दिलाने और युवाओं को आंदोलनों के पीछे के तथ्यों को समझने की अपील की है। समिति का संदेश है कि देश का युवा समझदार, तार्किक और संस्कारवान बने, ताकि उसकी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में काम आए।

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