जबलपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। पनागर ब्लॉक के बेलखाड़ू के पास ग्राम खेरी में संचालित अश्विनी अस्पताल में 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और औषधि विभाग की कार्रवाई में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल के पास न तो क्लीनिक संचालन का पंजीयन था और न ही एलोपैथिक दवाओं से इलाज करने की अनुमति। इतना ही नहीं, मौके पर एक्सपायरी डेट की दवाइयां भी मिली हैं। परिजनों ने अस्पताल में गलत इलाज के कारण श्वेता की मौत होने का आरोप लगाया है। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अस्पताल को सील कर दिया गया है।
जबलपुर सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी के मुताबिक, बेलखाड़ू क्षेत्र में अश्विनी अस्पताल का संचालन सतीश साहू और सरिता साहू द्वारा किया जा रहा था। बताया गया कि शेखर चौधरी ने शाम को अस्पताल में इलाज कराया था। इसके बाद वह अगली सुबह दोबारा उपचार के लिए पहुँचा, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में किए गए उपचार पर सवाल उठाते हुए लापरवाही के आरोप लगाए। इसके बाद बेलखाड़ू पुलिस चौकी में मामला दर्ज किया गया और मृतका का पोस्टमार्टम कराया गया।
सीएमएचओ ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित ब्लॉक की बीएमओ मिश्रा ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में मिली अनियमितताओं के आधार पर प्रतिवेदन तैयार कर पुलिस को सौंपा गया। प्रतिवेदन के अनुसार, अस्पताल का कोई वैध पंजीयन नहीं था। वहां इलाज करने वाले चिकित्सक के वैध पंजीयन को लेकर भी अनियमितता सामने आई। जांच में उपचार के दौरान एक्सपायरी डेट की दवाइयों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अस्पताल को सील कर दिया गया।
मामले में औषधि विभाग ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल के अनुसार, अस्पताल में दवाइयों के संग्रहण और एक्सपायरी दवाओं के इस्तेमाल संबंधी प्रतिवेदन मिलने के बाद कार्रवाई की गई। न्यायालय से कस्टडी प्राप्त करने के बाद सील परिसर को खोलकर दवाइयां जब्त की गईं। जब्त दवाओं में कुछ एक्सपायरी दवाइयां, बच्चों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां और महिलाओं से संबंधित दवाएं शामिल हैं। मौके से प्रेग्नेंसी किट और गर्भनिरोधक दवाइयां भी मिली हैं।
प्रवीण पटेल ने बताया कि मौके पर दवाओं के क्रय-विक्रय, भंडारण या एलोपैथिक उपचार से संबंधित कोई लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया गया। जब्त दवाइयों को जांच के लिए भेजा गया है। संबंधित संचालकों से आवश्यक दस्तावेज मांगे जाएंगे और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने कहा कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज है और अवैध रूप से इलाज करने वाला चिकित्सक फिलहाल जेल में है। स्वास्थ्य विभाग की जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य जिम्मेदारों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शेखर चौधरी की मौत के पीछे उपचार में लापरवाही और दवाओं की भूमिका की जांच जारी है। परिजनों के आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही हो सकेगी।
